28 मार्च: हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री-प्राइमरी स्कूलों और डे-केयर सेंटरों के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अधिसूचित बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रेशन और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र संचालित नहीं किया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य छोटे बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व देखरेख सुनिश्चित करना है। नए नियमों के अनुसार सभी केंद्रों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके लिए एक माह के भीतर पोर्टल शुरू किया जाएगा। पंजीकरण के लिए कुल ₹15,000 फीस निर्धारित की गई है, जिसमें ₹5,000 प्रोसेसिंग और ₹10,000 रजिस्ट्रेशन शुल्क शामिल है।
पंजीकरण प्रक्रिया तीन स्तरों पर होगी—पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा जांच, फिर निरीक्षण समिति द्वारा स्थल निरीक्षण और अंत में निदेशालय स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी मानकों को पूरा करने पर ही प्रमाण पत्र जारी होगा। अधूरी सुविधाओं वाले केंद्रों को 6 माह का अस्थायी पंजीकरण दिया जा सकता है।
नियमों के तहत 20 बच्चों के लिए कम से कम 28 वर्गमीटर कक्षा, खेल क्षेत्र, शौचालय, रसोई, विश्राम कक्ष, सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार किट और सुरक्षित पेयजल जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप और बाधा मुक्त प्रवेश की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
इसके अलावा हर केंद्र में पीटीए का गठन, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग और शैक्षिक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पंजीकरण रद्द करना भी शामिल है।