1 फरबरी: हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण का चौथा चरण आज यानी 1 फरवरी से शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को निर्देश देते हुए कहा है कि सर्वेक्षण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक पात्र परिवार को बीपीएल सूची में शामिल किया जाए। यह सर्वेक्षण कुल पांच चरणों में पूरा किया जा रहा है, ताकि सभी जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
सरकार द्वारा अब तक पूरे किए गए तीन चरणों में राज्यभर में कुल 59,829 बीपीएल परिवारों को सूची में शामिल किया जा चुका है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर में 2,204, चंबा में 13,786, हमीरपुर में 3,480, कांगड़ा में 10,807, किन्नौर में 1,109, कुल्लू में 2,957, लाहौल-स्पीति में 206, मंडी में 12,045, शिमला में 4,522, सिरमौर में 1,277, सोलन में 1,567 और ऊना जिले में 5,869 परिवारों की पहचान की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीपीएल सूची में उन परिवारों को शामिल किया जाएगा जिनमें 27 वर्ष तक के अनाथ, 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य, या 27 से 59 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग सदस्य हैं। इसके अलावा महिला मुखिया वाले वे परिवार जिनमें 27 से 59 वर्ष आयु का कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं है, तथा 50 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवार भी पात्र माने जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में मनरेगा के तहत न्यूनतम 100 दिन कार्य करने वाले परिवारों को भी बीपीएल श्रेणी में शामिल किया जाएगा। साथ ही जिन परिवारों के कमाई करने वाले सदस्य कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया या किसी अन्य गंभीर और स्थायी दिव्यांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें भी बीपीएल सूची में स्थान दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य या केंद्र सरकार की आवास योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर पक्के मकानों में रहने वाले परिवारों को भी बीपीएल श्रेणी में शामिल किया जाएगा।