04 फरवरी: हिमाचल प्रदेश के कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन पर अब यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित होने जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण को ध्यान में रखते हुए देश का पहला हाईटेक ‘गोकुल धाम’ तैयार किया है। बिलासपुर जिले में टीहरा टनल के समीप निर्मित यह गोकुल धाम केवल गौशाला नहीं, बल्कि बेसहारा पशुओं के लिए एक आधुनिक कल्याण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
एनएचएआई ने निर्माण कंपनी गाबर के सहयोग से इस परियोजना को साकार किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकना और उन्हें सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है। चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर बेसहारा पशुओं के कारण दुर्घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसे देखते हुए यह ठोस कदम उठाया गया है।
गोकुल धाम में एक साथ 100 से अधिक पशुओं के रख-रखाव की व्यवस्था की गई है। परिसर में अत्याधुनिक पशु चिकित्सा डिस्पेंसरी स्थापित की गई है, जहां 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात रहेंगे। आपात स्थिति में पशुओं के रेस्क्यू के लिए एंबुलेंस सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है।
इसके अतिरिक्त, हाईवे पर घूमने वाले अन्य बेसहारा पशुओं की सुरक्षा के लिए उनके गले में रेडियम बेल्ट और सींगों पर रेडियम टेप लगाए जाएंगे, ताकि रात के समय वाहन चालकों को वे दूर से ही दिखाई दे सकें और दुर्घटनाओं से बचाव हो सके।
टीहरा टनल के पास बने पहले गोकुल धाम की सफलता को देखते हुए एनएचएआई ने प्रदेश में दूसरे गोकुल धाम के निर्माण की तैयारी भी शुरू कर दी है, जिसके लिए उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है। हिमाचल में अपनाए गए इस मॉडल को अब अन्य राज्य भी हाईवे सुरक्षा और पशु संरक्षण के लिए अपनाने की योजना बना रहे हैं।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि एनएचएआई केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहा है। गाबर कंपनी के सहयोग से बना यह गोकुल धाम भविष्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।