2 अप्रैल: देशभर में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विरोध के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए एक वैकल्पिक सुविधा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव नहीं डाला जा रहा है। केवल वही उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं, जो स्वेच्छा से इसे अपनाना चाहते हैं।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि प्रीपेड मीटर के लिए सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी) का प्रावधान है, जिसे उपभोक्ता द्वारा सेवा बंद करने पर वापस कर दिया जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह उपभोक्ता की सुविधा पर आधारित है और इसे कभी भी बदला जा सकता है।
सरकार के अनुसार, जिन राज्यों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लागू किए गए हैं, वहां बिजली कंपनियों के घाटे में कमी आई है और बिल भुगतान की स्थिति में सुधार हुआ है।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कहीं जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की शिकायत मिलती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिजली चोरी रोकने और भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।