शिलारू में तैयार हो रहा शिमला का पहला ब्लूबेरी बगीचा, बागवानों के लिए खुलेगा आय का नया रास्ता

26 जनवरी: उद्यान विभाग द्वारा शिमला जिले के शिलारू क्षेत्र में जिले का पहला ब्लूबेरी बगीचा विकसित किया जा रहा है। इस पहल से बागवानों के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे, क्योंकि ब्लूबेरी की देश-विदेश दोनों में भारी मांग है।

परियोजना के प्रथम चरण में शिलारू स्थित बागवानी परिसर में पॉलीहाउस तकनीक के तहत लगभग दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में 1,900 ब्लूबेरी के पौधे लगाए गए हैं। पौधों का चयन जलवायु और मिट्टी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। ब्लूबेरी का पौधा दो से तीन वर्ष में फल देना शुरू कर देता है और एक वयस्क पौधे से प्रतिवर्ष तीन से पांच किलोग्राम तक फल प्राप्त हो सकता है। फूल आने के बाद फल पकने में 45 से 60 दिन का समय लगता है।

उद्यान विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार ब्लूबेरी की खेती के लिए नियंत्रित तापमान, नमी और मिट्टी का उपयुक्त पीएच स्तर आवश्यक होता है। इसी कारण फिलहाल पॉलीहाउस में इसका ट्रायल किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहने पर इसे खुले खेतों और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है।

अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करना है। बाजार में ब्लूबेरी 1000 से 3000 रुपये प्रति किलो तक बिकती है, जिससे कम क्षेत्र में अधिक मुनाफा संभव है। परियोजना के सफल होने पर स्थानीय बागवानों को पौधे उपलब्ध करवाने के साथ-साथ प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

ब्लूबेरी न केवल स्वादिष्ट फल है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट मधुमेह, रक्तचाप और वजन नियंत्रण में सहायक होते हैं, जबकि इसमें विटामिन सी की मात्रा भी अधिक होती है। फल के साथ-साथ इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण पारंपरिक फसलों की उत्पादकता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए उद्यान विभाग बागवानों को समय के साथ नई और लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिसमें ब्लूबेरी एक उभरता हुआ विकल्प बनकर सामने आई है।

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