04 फरवरी: साइबर ठग ठगी के नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अब वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग जैसे हाईटेक तरीकों से बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले जा रहे हैं। शिमला शहर में सामने आए ऐसे ही एक मामले में एक बुजुर्ग के खाते से अनजान कॉल आने के बाद दस लाख रुपये की राशि निकाल ली गई।
मामला छोटा शिमला क्षेत्र का है। पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि उन्हें न तो कोई ओटीपी प्राप्त हुआ और न ही उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया। केवल एक अनजान नंबर से कॉल आई थी, जिसे उठाते ही खाते से रकम निकलने के मैसेज आने लगे। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग फोन पर किसी जानकार की आवाज में बात करवा कर कॉल मर्ज करवाते हैं। जैसे ही कॉल मर्ज होती है, फोन बैंक के ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम से जुड़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में साइबर अपराधी कॉल फारवर्डिंग के लिए कोड डायल करवाते हैं। इससे कॉल और मैसेज दूसरे नंबर पर ट्रांसफर हो जाते हैं और ठग ओटीपी जनरेट कर खाते से पैसे निकाल लेते हैं। शिमला पुलिस के साथ-साथ साइबर विंग की टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जिन बैंक खातों के माध्यम से राशि ट्रांसफर हुई है, उनकी कड़ी दर कड़ी जांच की जा रही है।
साइबर विशेषज्ञ एवं आईटी कंपनी संचालक अजय ने बताया कि सीधे कॉल से ठगी करना मुश्किल होता है, लेकिन लोग लालच, डर या भ्रम में आकर कोड डायल कर देते हैं या कॉल मर्ज कर लेते हैं। ऐसे मामलों में शिकायत में देरी होने पर पैसे वापस मिलना कठिन हो जाता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
- अनजान कॉल पर किसी भी तरह की कॉल फारवर्डिंग (जैसे *21 या *401#) सक्रिय न करें।
- गलती से फारवर्डिंग चालू हो जाए तो ##002# डायल कर सभी फारवर्डिंग बंद करें।
- *#21# डायल कर जांचें कि आपकी कॉल या मैसेज फारवर्ड तो नहीं हो रहे।
- किसी को भी ओटीपी साझा न करें, चाहे वह खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अनजान कॉल के जरिए हो रही ठगी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।