04 फरवरी : केंद्रीय बजट में राज्यों को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (RDG) समाप्त किए जाने से हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। प्रदेश सरकार के आकलन के अनुसार इस फैसले से हिमाचल को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की संभावना है। घाटे की भरपाई को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में अहम निर्णय लेने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आरडीजी बंद होने से उत्पन्न वित्तीय संकट से निपटने के लिए राज्य में स्थापित सभी जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि पर टैक्स लगाने का फैसला लिया गया है। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए 8 फरवरी को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक रविवार को सुबह 11 बजे के बाद राज्य सचिवालय में आयोजित होगी।
मंत्रिमंडल की बैठक में जल विद्युत परियोजनाओं पर भूमि कर लगाने के प्रस्ताव के साथ-साथ आगामी विधानसभा बजट सत्र की तिथियों को लेकर भी चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद पेश किए गए केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रदेश सरकार की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से राजनीति से ऊपर उठकर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से बनी परिस्थितियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल बैठक के बाद मुख्यमंत्री कांग्रेस विधायक दल और भाजपा विधायकों के साथ भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा कर सकते हैं।