27 फरवरी: राजगढ़ उपमंडल के अंतर्गत ठौड़ निवाड़ पंचायत के ग्राम चौकी, गिरी गंगा नदी के पावन तट पर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। सिरमौर टाइल्स के सौजन्य से आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा क्षेत्रवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्ञान का स्रोत बनी हुई है। कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
व्यास पीठ से कथा वाचन कर रहे आचार्य सुभाष शर्मा ने अपने ओजस्वी और सारगर्भित प्रवचनों से धर्म, सदाचार और विवेक का संदेश दिया। विशेष रूप से उन्होंने ‘बलि प्रथा’ विषय पर धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों सहित विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य ने स्पष्ट किया कि प्राचीन काल में ‘बलि’ का अर्थ किसी जीव की हत्या नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करना था। उन्होंने कहा कि समय के साथ इस परंपरा की व्याख्या में परिवर्तन आया और कई स्थानों पर इसे जीव हत्या से जोड़ दिया गया, जो धर्म के मूल सिद्धांत—करुणा, दया और अहिंसा—के विपरीत है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि धर्म को आस्था के साथ-साथ विवेक से भी समझा जाए। उनके अनुसार सच्चा धर्म वही है, जो मानवता, सहानुभूति और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करे। प्रवचन के दौरान कथा पंडाल में गहन शांति और भावपूर्ण वातावरण बना रहा।
कथा स्थल पर प्रतिदिन मूल पाठ, पूर्वांग पूजन, भजन-कीर्तन, कथा प्रवचन और संध्या आरती का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही विशाल भंडारे में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कथा का समापन 2 मार्च को पूर्णाहुति एवं हवन यज्ञ के साथ होगा। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।