राजगढ़ (सिरमौर) के शाया में सामाजिक एकता की मांग तेज, ‘नौ तबीन’ को एक मंच पर लाने के लिए आमरण अनशन

27 फरवरी: सिरमौर जिला के राजगढ़ क्षेत्र स्थित शाया गांव, जो शिरगुल महाराज की पावन जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है, इन दिनों सामाजिक एकता को लेकर चर्चा में है। ‘नौ तबीन’—अर्थात नौ अलग-अलग क्षेत्रों की देव प्रजा—के बीच बढ़ते मतभेदों को समाप्त करने की मांग को लेकर थानाधार गांव निवासी देवा रविंद्र कंवर आमरण अनशन पर बैठे हैं।

देवा कंवर ने देव समाज में बढ़ती दूरी और गुटबाजी पर चिंता जताते हुए अन्न-जल त्याग दिया है। उनका कहना है कि जब सभी नौ तबीनों के आराध्य एक हैं, तो समाज में विभाजन नहीं होना चाहिए।

उनके अनुसार समय के साथ नौ तबीनों के बीच संवाद की कमी से आपसी मतभेद बढ़े हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन किसी व्यक्ति या विशेष तबीन के विरोध में नहीं, बल्कि सामूहिक एकजुटता के समर्थन में है।

वे मांग कर रहे हैं कि महाराज ‘गुर’ के माध्यम से दरबार से ऐसा मार्गदर्शन मिले, जिससे नौ तबीनों के बीच भाईचारे और सहयोग की भावना को फिर से मजबूत किया जा सके।

शाया में भव्य मंदिर निर्माण का कार्य भी जारी है। देवा कंवर का कहना है कि धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयास तभी पूर्ण होंगे, जब समाज में एकता बनी रहे।

अनशन स्थल पर विभिन्न तबीनों के लोग पहुंचकर समर्थन जता रहे हैं। वहीं क्षेत्र के कई बुद्धिजीवी और सम्मानित नागरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन देवा कंवर अपने संकल्प पर कायम हैं।

यह पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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