28 जनवरी: लगभग चार महीने के लंबे इंतजार के बाद राजगढ़ क्षेत्र में मौसम ने करवट लेते हुए किसानों और बागवानों को बड़ी राहत दी है। बसंत पंचमी और गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि के अवसर पर क्षेत्र में मेघ बरसे। बीते पांच दिनों के दौरान राजगढ़ क्षेत्र में लगभग 105 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि ऊँचाई वाले इलाकों में एक फुट तक हिमपात हुआ है।
वहीं, समुद्र तल से करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित चुड़धार चोटी पर इस समय दो से तीन फुट तक बर्फबारी होने की सूचना है, जिससे ठंड में भी खासा इजाफा दर्ज किया गया है।
लगातार बारिश और बर्फबारी के बावजूद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुचारू बनी हुई है। हालांकि, बिजली आपूर्ति में बार-बार हो रही कटौती से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से घरेलू कार्यों के साथ-साथ कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
दूसरी ओर, यह बारिश और हिमपात किसानों व बागवानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। लंबे समय से चले आ रहे सूखे के कारण सेब, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसी फलदार फसलों में खाद डालने, कटिंग, प्रूनिंग और मल्चिंग जैसे जरूरी कार्य प्रभावित हो गए थे, जो अब फिर से शुरू हो पाए हैं।
वहीं, लहसुन, मटर, आलू, गेहूं और जौ जैसी रबी फसलें नमी की कमी के कारण गंभीर संकट में थीं। भूमि में पर्याप्त नमी न होने से फसलों की बढ़वार रुक गई थी। मौजूदा वर्षा से मिट्टी में नमी लौट आई है, जिससे फसलों को नई संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी है। यदि यह बारिश नहीं होती, तो आने वाले समय में किसानों और बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता था।
बागवानों का कहना है कि यह बारिश सेब सहित अन्य फलों की गुणवत्ता और उत्पादन के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी, जबकि किसान भी रबी फसलों की बेहतर पैदावार को लेकर आशान्वित नजर आ रहे हैं।
कुल मिलाकर, मौसम की यह मेहरबानी जहां एक ओर ठंड और बिजली कटौती जैसी परेशानियां लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर राजगढ़ क्षेत्र की कृषि और बागवानी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद शुभ संकेत मानी जा रही है।