16 फरवरी: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार की ‘भोजन पारखी योजना’ के तहत अब बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन को पहले माताओं की समिति द्वारा चखा जाएगा, उसके बाद ही वितरण किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक स्कूल में स्थानीय महिलाओं और विद्यार्थियों की माताओं की एक समिति गठित की जाएगी। भोजन वितरण से लगभग 30 मिनट पूर्व समिति की एक या दो सदस्याएं स्कूल पहुंचकर तैयार भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और स्वच्छता की जांच करेंगी। भोजन मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही उसे बच्चों को परोसा जाएगा।
पहले यह जिम्मेदारी शिक्षकों के पास थी, लेकिन अब पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से माताओं की भूमिका को अनिवार्य किया गया है।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक स्कूल में मिड-डे मील प्रभारी को अलग रजिस्टर संधारित करना होगा। ड्यूटी पर मौजूद महिला सदस्य को भोजन चखने के बाद अपनी टिप्पणी दर्ज कर हस्ताक्षर करने होंगे। इस पहल से प्री-नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के लगभग 5.64 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।
जिला एमडीएम नोडल अधिकारी राज कुमार पराशर के अनुसार, यदि कोई स्कूल निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करता है या रिकॉर्ड में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।