मनरेगा में 1.71 लाख विकास कार्य अधूरे, मंत्रालय की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

2 फरवरी : हिमाचल प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत पिछले वर्षों से 1,71,841 विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इन कार्यों को स्पिलओवर वर्क के रूप में चिन्हित किया गया है। ये वे कार्य हैं जो पूर्व वर्षों में स्वीकृत तो हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से समय पर पूरे नहीं हो सके। इसका खुलासा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की हिमाचल प्रदेश से संबंधित रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार स्पिलओवर कार्यों में सबसे अधिक संख्या व्यक्तिगत भूमि पर किए जाने वाले कार्यों की है, जिनकी संख्या 1,46,653 है। इसके अलावा ग्रामीण संपर्क से जुड़े 11,110, भूमि विकास के 3,336, जल संरक्षण एवं जल संचयन के 2,651 तथा पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के 295 कार्य शामिल हैं। वहीं बाढ़ नियंत्रण एवं संरक्षण से संबंधित 4,305 कार्य भी अधूरे हैं।

जिला-वार आंकड़ों में मंडी जिला सबसे आगे है, जहां 34,698 स्पिलओवर कार्य दर्ज किए गए हैं। इसके बाद चंबा में 26,863, कांगड़ा में 26,155, शिमला में 19,211, कुल्लू में 17,299 और लाहौल-स्पीति में 378 अधूरे कार्य शामिल हैं। राज्य के सभी 12 जिलों में किसी न किसी श्रेणी में मनरेगा के कार्य लंबित हैं, जिससे ग्रामीण रोजगार, आधारभूत ढांचे और किसानों से जुड़े विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत बड़ी संख्या में कार्य स्पिलओवर होने का प्रमुख कारण भारत सरकार की ओर से मजदूरी और सामग्री मद की राशि समय पर जारी न होना है। भुगतान न होने के कारण पंचायतें मजदूरी और निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं कर पा रही हैं, जिससे कार्य अधूरे रह गए हैं।

मनरेगा के तहत ट्रांसजेंडर पंजीकरण में सामने आई विसंगतियों को लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने जांच बैठा दी है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और आंकड़ों की सही सीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत कुल 131 ट्रांसजेंडर पंजीकृत हैं, जिनमें मंडी से 31, शिमला से 24, कांगड़ा से 18, चंबा से 15, सिरमौर से 14, सोलन से 10, बिलासपुर से 6, हमीरपुर से 5, ऊना से 4 तथा किन्नौर और कुल्लू से 2-2 पंजीकरण दर्ज हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रदेश की 655 ग्राम पंचायतों में दिसंबर माह के दौरान मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को काम नहीं मिला। कुल 3616 ग्राम पंचायतों में से 77 पंचायतों में मनरेगा का कोई बजट खर्च नहीं किया गया। कार्यदिवस सृजन में शिमला जिला सबसे पीछे रहा, जहां 149 पंचायतें फिसड्डी पाई गईं। पिछले छह महीनों में प्रदेश की एक हजार से अधिक पंचायतें मनरेगा के तहत कार्यदिवस सृजित करने में नाकाम रही हैं।

Social Sharing

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *