28 जनवरी: आरएलए बिलासपुर में सामने आए बहुचर्चित वाहन पंजीकरण घोटाले की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार फर्जी वाहन पंजीकरण का पूरा नेटवर्क फरार सीनियर असिस्टेंट गौरव द्वारा संचालित किया जा रहा था, जबकि काम शराब के सहारे करवाया जाता था।
सूत्रों के मुताबिक पहले से गिरफ्तार वरिष्ठ सहायक सुभाष को न तो पैसों के लेनदेन की जानकारी थी और न ही पूरे नेटवर्क की समझ। उससे जो भी काम कराया जाता था, उसके बदले केवल शराब की बोतल दी जाती थी। इसी वजह से वह पूछताछ में पैसों की कड़ी को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहा है।
जांच में सामने आया है कि बीएस-4 से बीएस-6 पोर्टल ट्रांजिशन के दौरान बैकएंड के माध्यम से सैकड़ों वाहनों की फर्जी एंट्री की गई। उस समय गौरव आरएलए बिलासपुर में तैनात था। आरोप है कि उसके पास विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे, जिनका इस्तेमाल कर फर्जी रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी गई।
पुलिस की सक्रियता बढ़ते ही गौरव फरार हो गया। दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने बीते बुधवार और वीरवार को बिलासपुर स्थित उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। मौके पर उसकी आलीशान कोठी और लग्जरी गाड़ियां पाई गईं, जिनकी फोटोग्राफी की गई है।
सूत्रों के अनुसार गौरव दिल्ली में अग्रिम जमानत लेने की कोशिश कर रहा है। उसने एक बार जमानत अर्जी दाखिल कर बाद में वापस ले ली थी, जबकि अब दोबारा प्रयास किया जा रहा है।
आय से अधिक संपत्ति जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को गौरव के पास थार, क्रेटा जैसी महंगी गाड़ियां, वीआईपी नंबर प्लेट और एसी युक्त आलीशान मकान मिले हैं। एक सीनियर असिस्टेंट के पद पर रहते हुए इतनी संपत्ति कैसे अर्जित की गई, यह अब जांच का अहम बिंदु बन गया है।