आवाज़ ए हिमाचल
24 मार्च 2026/ हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर भारतीय मजदूर संघ (भामसं) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह कर्मचारी विरोधी करार दिया है और आरोप लगाया है कि इस बजट ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा, महामंत्री यशपाल हेठा, कोषाध्यक्ष अमीन चंद डोगरा, प्रदेश उप महामंत्री देवी दत्त तनवर, प्रदेश उपाध्यक्ष सुषमा शर्मा, दिनेश शर्मा, रमेश राणा, सचिव नरेश ठाकुर, राजू भारद्वाज तथा सुमन संडल ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि चुनावों के दौरान सरकार ने बोर्ड, निगमों और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को पेंशन देने का वादा किया था, लेकिन लगातार चौथे बजट में भी इस दिशा में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष और निराशा का माहौल है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के छठे वेतन आयोग की लंबित देनदारियों और महंगाई भत्ते की बकाया किस्तों के भुगतान को लेकर कर्मचारियों को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने इन अहम मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिससे कर्मचारियों को खुद को ठगा हुआ महसूस हो रहा है। संघ ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में छोटे पदों को सृजित करने की बजाय सैकड़ों पदों को समाप्त किया जा रहा है और कई स्थानों पर खाली पदों के साथ-साथ भरे हुए पदों को भी डाइंग कैडर में डालकर खत्म किया जा रहा है, जिससे न केवल बेरोजगार युवाओं के रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं, बल्कि कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो रहा है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों की मेहनत से आय अर्जित करने वाले संस्थानों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। अंत में भामसं पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि छठे वेतन आयोग की लंबित राशि, महंगाई भत्ते की किस्तों और पेंशन संबंधी वादों को तुरंत पूरा किया जाए, अन्यथा प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। �