23 फरवरी: डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच फ्री ट्रायल के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। साइबर अपराधी ऐप्स और सब्सक्रिप्शन सेवाओं के जरिए उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों से छोटी-छोटी रकम ऑटो-डेबिट कर रहे हैं।
साइबर सेल के अनुसार, ठग ओटीटी प्लेटफॉर्म, गेमिंग और फिटनेस ऐप्स के नाम पर फ्री ट्रायल का ऑफर देते हैं। इंस्टॉलेशन के दौरान यूजर्स से कार्ड या यूपीआई ऑटो-पे की अनुमति ली जाती है। ट्रायल अवधि समाप्त होते ही खाते से स्वतः राशि कटनी शुरू हो जाती है।
प्रारंभिक कटौती कम राशि (जैसे 10 से 99 रुपये) की होने के कारण कई उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक इसका पता नहीं चलता। बाद में यह रकम बढ़कर बड़ा नुकसान बन सकती है।
पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में फर्जी ऐप्स को ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से प्रमोट किया जा रहा है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें और नियम एवं शर्तें ध्यानपूर्वक पढ़ें।
सुरक्षा के लिए सुझाव:
- फ्री ट्रायल लेते समय ऑटो-रिन्यूअल की शर्तें अवश्य जांचें।
- बैंक स्टेटमेंट और एसएमएस अलर्ट नियमित रूप से देखें।
- मोबाइल के सब्सक्रिप्शन सेक्शन में अनावश्यक सेवाओं को समय रहते रद्द करें।
- अनधिकृत लेन-देन की स्थिति में तुरंत बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतने की अपील की है।