फाल्गुन पूर्णिमा पर अद्भुत संयोग: 3 मार्च 2026 को खग्रास चंद्रग्रहण, जानिए धार्मिक महत्व और सूतक काल

आवाज़ ए हिमाचल /01 मार्च

03 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर खग्रास (ग्रस्तोदय) चंद्रग्रहण पड़ेगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी भृगु ज्योतिषलय पिंजौर के ज्योतिषाचार्य हंसराज शांडिल्य द्वारा प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि यह चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में दिखाई देगा, लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा उदय होने से पहले ही ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा। भारत के किसी भी नगर में ग्रहण का प्रारंभिक चरण दिखाई नहीं देगा। केवल पूर्वी राज्यों — पश्चिम बंगाल, नागालैंड, मिजोरम, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश — में ग्रहण की समाप्ति देखी जा सकेगी। शेष भारत में चंद्र उदय के समय तक खग्रास समाप्त हो चुका होगा और केवल अंतिम चरण दिखाई देगा।

🌒 ग्रहण का समय (3 मार्च 2026)

ग्रहण स्पर्श: 3:20 बजे

खग्रास प्रारंभ: 4:34 बजे

खग्रास मध्य: 5:04 बजे

खग्रास समाप्त: 5:32 बजे

ग्रहण समाप्त: 6:47 बजे

कुल अवधि: 3 घंटे 27 मिनट

⏳ सूतक काल

इस ग्रहण का सूतक 3 मार्च 2026 को प्रातः 6:20 बजे से प्रारंभ होगा।

🔮 राशियों पर प्रभाव

ज्योतिषाचार्य हंसराज शांडिल्य के अनुसार मेष राशि वालों को अधिक खर्च व चिंता, वृषभ को कार्य सिद्धि व धन लाभ, मिथुन को प्रगति, कर्क को धन हानि, सिंह को आर्थिक कष्ट, कन्या को परेशानी, तुला को धन लाभ, वृश्चिक को रोग कष्ट, धनु को संतान संबंधी चिंता, मकर को शत्रु भय, कुंभ को दांपत्य कष्ट तथा मीन को रोग व कार्य विलंब का सामना करना पड़ सकता है।

🕉 धार्मिक मान्यताएं

सूतक एवं ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, मंत्र साधना और ध्यान करना कल्याणकारी माना गया है। इस दौरान नाखून काटना, अनावश्यक भोजन करना, मूर्ति स्पर्श, झूठ बोलना और अन्य अशुभ कार्यों से बचने की सलाह दी गई है।

जो लोग गंगा या अन्य तीर्थ स्थलों पर नहीं जा सकते, वे घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान कर पूजा-पाठ कर सकते हैं। बाल, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता अनुसार भोजन या दवा लेने में कोई दोष नहीं माना गया है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह खग्रास चंद्रग्रहण धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

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