फर्जी वाहन रजिस्ट्रेशन केस में बड़ा खुलासा: सीनियर असिस्टेंट के ठिकानों पर दिल्ली क्राइम ब्रांच की रेड, आरोपी फरार

23 जनवरी: बिलासपुर आरएलए कार्यालय में चोरी की गाड़ियों के फर्जी दस्तावेजों के जरिए पंजीकरण के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई तेज करते हुए सीनियर असिस्टेंट गौरव की तलाश शुरू कर दी है। बुधवार रात और वीरवार को टीम ने उसके घर सहित अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही आरोपी फरार हो गया।

सूत्रों के अनुसार, गौरव को छापेमारी की भनक लग गई थी, जिसके बाद वह मौके से निकल गया। बताया जा रहा है कि वह अग्रिम जमानत की कोशिश में दिल्ली पहुंच चुका है। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

परिवहन निदेशालय ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसी बीच, मामले में पहले से गिरफ्तार किए गए आरएलए के वरिष्ठ सहायक सुभाष चंद को निलंबित कर दिया गया है। सुभाष को 20 जनवरी को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हिरासत में लेने के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था।

मुख्य आरोपी झंडूता में तैनात : जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी गौरव वर्तमान में आरएलए झंडूता में तैनात है। क्राइम ब्रांच की टीम जब उसके आवास पर पहुंची, तो वह वहां मौजूद नहीं था। टीम ने उसके आवास और लग्जरी वाहनों की फोटोग्राफी भी की है।

जांच में सामने आया है कि जब वाहन पंजीकरण पोर्टल को बीएस-4 से बीएस-6 प्रणाली में बदला जा रहा था, उसी दौरान बैकएंड के जरिए सैकड़ों वाहनों की फर्जी एंट्री की गई। उस समय गौरव आरएलए बिलासपुर में तैनात था।

लॉगइन आईडी के दुरुपयोग का आरोप :  आरोप है कि गौरव के पास अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की लॉगइन आईडी व पासवर्ड थे, जिनका इस्तेमाल कर उसने फर्जी रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी। गिरफ्तार आरोपी सुभाष से पूछताछ के दौरान ही गौरव का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया।

उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि गौरव को निलंबित करने और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन को मिली शिकायत में विशेष रूप से एचपी-97 (इंदौरा) सीरीज के अंतर्गत बीएस-4 वाहनों के पंजीकरण में नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है।

15 दिन में मांगी रिपोर्ट : परिवहन निदेशालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव, परिवहन निदेशालय के आईटी उप प्रबंधक त्रिलोक चंद और आरटीओ शिमला के वरिष्ठ मोटर वाहन निरीक्षक पंकज सिंह को शामिल किया गया है। समिति आरएलए कार्यालय में हुई कथित अनियमितताओं की गहन जांच करेगी।

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