2 फरवरी : पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ढालपुर शाखा में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण घोटाले के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत शिमला ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन बैंक मैनेजर अमर सिंह बोध (काजा) को तीन साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं लाभार्थी भोलू राम (कुल्लू) और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले ताशी फुंचोग (भुंतर) को चार-चार साल की कैद और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना अदा न करने पर चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सीबीआई की विशेष अदालत ने चालान संख्या-7 में यह फैसला सुनाते हुए माना कि वर्ष 2010 से 2013 के बीच आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी जमाबंदी और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर 4 लाख रुपये का केसीसी ऋण मंजूर कराया। विशेषज्ञ रिपोर्ट में राजस्व अधिकारियों के नाम से किए गए हस्ताक्षर और मुहरों को फर्जी पाया गया, जबकि आरोपियों के हस्ताक्षर ऋण दस्तावेजों पर सही साबित हुए।
अदालत ने पाया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमर सिंह बोध ने दस्तावेजों की सत्यता की जांच किए बिना ऋण की सिफारिश की और पद का दुरुपयोग करते हुए सह-आरोपी की मदद से घोटाले को अंजाम दिया। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।
इस मामले में 11 अप्रैल 2015 को पीएनबी के सर्कल प्रमुख राजीव खन्ना की शिकायत पर सीबीआई शिमला शाखा ने धोखाधड़ी, जालसाजी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।