12 अप्रैल, शाहपुर (कोहली): भूतपूर्व सैनिक जनकल्याण सभा रैत के अध्यक्ष मदन शर्मा ने प्राइवेट स्कूलों के प्रचलन पर सवाल उठाते हुए नेपाल सरकार द्वारा निजी स्कूलों पर पाबंदी लगाने के कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगा है, जो एक सराहनीय पहल है।
मदन शर्मा ने कहा कि यदि प्राइवेट स्कूलों के साथ-साथ अनियंत्रित रूप से खुल रहे निजी अस्पतालों पर भी सख्ती की जाए, तो इससे न केवल सरकार को लाभ होगा बल्कि बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी स्कूल शिक्षित बेरोजगार युवाओं का शोषण कर रहे हैं। उन्हें कम वेतन देकर शिक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी करवाए जाते हैं। ऐसे में नौकरी करने वाले युवाओं की स्थिति “सांप के मुंह में छुछंदर” जैसी हो जाती है।
मदन शर्मा ने यह भी कहा कि अभिभावकों पर भी अनावश्यक खर्चों का बोझ डाला जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। वहीं, निजी अस्पतालों पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये संस्थान मरीजों के इलाज से ज्यादा उनके परिजनों की जेब पर बोझ डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी हेल्थ कार्ड योजनाओं का लाभ आम जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच रहा है। आरोप है कि निजी अस्पताल इलाज के नाम पर विभिन्न परीक्षणों में ही अधिकतर राशि खर्च करवा देते हैं और वास्तविक उपचार के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है।
मदन शर्मा ने सरकार से मांग की कि वह नेपाल सरकार की तर्ज पर सख्त नियम लागू करने पर विचार करे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्राइवेट स्कूलों को बंद नहीं किया जा सकता, तो उनमें शिक्षकों की नियुक्ति सरकार के माध्यम से की जाए। साथ ही, स्कूल प्रशासन द्वारा वेतन सरकारी खजाने में जमा कराया जाए और शिक्षकों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार भुगतान किया जाए।
उन्होंने कहा कि इससे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा।
इसके अलावा, उन्होंने निजी अस्पतालों में कार्ड प्रणाली को समाप्त कर मरीज को दिए गए बिल की समीक्षा के आधार पर ही भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।