05 फरवरी: अमेरिका द्वारा भारतीय दवा उद्योग पर लगाए गए 18 प्रतिशत टैरिफ का हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हिमाचल से केवल एक-दो कंपनियां ही अमेरिका को जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करती हैं, जबकि कुल सप्लाई में हिमाचल का योगदान मात्र करीब दो प्रतिशत है।
जानकारी के अनुसार भारत से अमेरिका को केवल 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं निर्यात की जाती हैं, जिनमें सबसे अधिक आपूर्ति हैदराबाद की दवा कंपनी ऑरोबिंदो फार्मा द्वारा की जाती है। इसके अलावा डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, सिप्ला, लूपिन, टोरेंट, जेड्स, नेटको और मोरकसंस सहित भारत की कुल नौ प्रमुख दवा कंपनियां अमेरिका में पहले से ही स्थापित हैं और वहीं से आपूर्ति कर रही हैं।
हिमाचल की यूनिकेम कंपनी से अमेरिका को कुछ जेनेरिक दवाएं जाती हैं, लेकिन कंपनी के प्लांट हिमाचल के अलावा अन्य राज्यों में भी स्थित हैं। इससे पहले अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व कार्यकाल के दौरान दवाओं पर कोई टैरिफ लागू नहीं था। मौजूदा कार्यकाल में 50 और 100 प्रतिशत टैरिफ की चर्चाएं जरूर रहीं, लेकिन फार्मा सेक्टर को इससे बाहर रखा गया था। अब 18 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की घोषणा की गई है।
दवा निर्माता सुरेश गर्ग ने कहा कि इस टैरिफ का हिमाचल के दवा उद्योग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने बताया कि अमेरिका की ओर से पहले दवाओं पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और मौजूदा टैरिफ का असर भी सीमित ही रहेगा।
उधर, हिमाचल प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने स्पष्ट किया कि उनका विभाग दवा निर्माण की निगरानी करता है और दवाओं का निर्यात कहां किया जा रहा है, इसका कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं होता।