जलवायु बदलाव से संकट में हिमाचल का सेब, घटती चिलिंग से सिकुड़ रही एपल बेल्ट

हिमाचल प्रदेश की पहचान माने जाने वाले सेब पर जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ नजर आने लगा है। डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्लाइमेट चेंज विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सतीश भारद्वाज ने चेतावनी देते हुए कहा है कि एपल बेल्ट में तापमान का लगातार बढ़ना सेब के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से सर्दियों में अपेक्षित ठंड और बर्फबारी नहीं हो पा रही, जिससे सेब के लिए जरूरी चिलिंग प्रभावित हो रही है। इस कारण निचले इलाकों से एपल बेल्ट धीरे-धीरे ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर खिसक रही है। इस वर्ष जनवरी में शिमला और चौपाल में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया, जो सेब उत्पादन के लिए चिंता का विषय है।

प्रोफेसर भारद्वाज के अनुसार चिलिंग पूरी न होने से फूल आने की प्रक्रिया, फल का रंग, आकार और गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने बागवानों को सेब पर पूरी तरह निर्भर न रहने की सलाह देते हुए अनार, कीवी, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने तथा कम चिलिंग वाली सेब किस्में लगाने पर जोर दिया।

प्रोग्रेसिव ग्रोअर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने भी कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर 6000 फुट से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की खेती पर पड़ रहा है। चिलिंग की कमी से पौधे डॉरमेंसी में नहीं जा पा रहे, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि हिमाचल का सेब उद्योग करीब 5500 करोड़ रुपये का है और प्रदेश के ढाई लाख से अधिक परिवार इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में बदलता मौसम न केवल सेब उत्पादन, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

Social Sharing

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *