3 अप्रैल: योग से रोग तो मिटेंगे ही, साथ में होगा चरित्र निर्माण — रजनेश कुमार (योगाचार्य)
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना, इच्छी, जिला कांगड़ा (हि.प्र.) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कन्या प्रशिक्षुओं के लिए पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के तत्वावधान में नि:शुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का संचालन योगाचार्य एवं पूर्णकालिक सेवाव्रती रजनेश कुमार द्वारा किया गया।
शिविर में भाग ले रही कन्या प्रशिक्षुओं को अष्टांग योग का महत्व समझाते हुए बताया गया कि योग के माध्यम से व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए आसन और प्राणायाम के जरिए प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि तक पहुंच सकता है। उन्होंने जंक फूड, मैदे से बनी वस्तुओं और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे हानिकारक पदार्थों से दूर रहने तथा मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बचने की अपील भी की।
इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता और रामायण के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। योग शिविर में योगिंग-जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, सूक्ष्म व्यायाम, विभिन्न प्रकार के आसनों के साथ-साथ भस्त्रिका, कपालभाति, उज्जायी, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी-उद्गीत प्राणायाम का अभ्यास करवाया गया। प्रशिक्षुओं को योग के माध्यम से निरोग रहने के उपाय भी विस्तार से बताए गए।
योगाचार्य ने कहा कि हम अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा दवाइयों पर खर्च कर देते हैं, जबकि यदि हम प्रतिदिन योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम रोजाना एक से दो घंटे अपने स्वास्थ्य के लिए निकालें, तो हम पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
शिविर के दौरान दैनिक दिनचर्या, संतुलित खान-पान और अध्यात्म के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि माता-पिता के बाद गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है, जो व्यक्ति के जीवन को दिशा देते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
संस्थान की ओर से निश्चय अवस्थी और अनुराधा ने भी योग के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि द्वारा योग दर्शन में योग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। आज की युवा पीढ़ी विभिन्न प्रकार के नशों और मानसिक समस्याओं की ओर बढ़ रही है, ऐसे में योग को अपनाकर वे संस्कारवान और देशभक्त नागरिक बन सकते हैं।
इस योग शिविर में डोलवी, आकृति, सिमरन, मीरा, पायल, आंबतिका और आरती सहित कुल 140 कन्या प्रशिक्षुओं ने भाग लिया और योग की सभी क्रियाओं को सीखकर उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर रमा देवी (योग शिक्षिका) और योग प्रचारक राजिंद्र सिंह ने भी विशेष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अंत में सिंहासन, हास्यासन और शांति पाठ के साथ शिविर का समापन किया गया।